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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेेंद्र मोदी ने आज कोरोना काल का देश के नाम पांचवां संबोधन किया।उन्होंने आत्म निर्भर भारत अभियान बीस लाख करोड़ रुपये का पैकेज देने का ऐलान कर दिया है। इसके जरिए देश के विभिन्न वर्गों को लाभ होगा। इस पैकेज में लैंड, लिक्विटी और लॉस पर बल दिया जाएगा। लघु उद्योगों, कुटिर उद्योगों के लिए यह काम आएगा। किसानों व श्रमिकों के लिए है यह पैकेज। उन्होंने कहा कि यह पैकेज देश के मध्यम वर्ग के लिए है। कल से आने वाले कुछ दिनों तक आत्म निर्भर भारत अभियान की जानकारी वित्त मंत्री देती रहेंगी।

उन्होंने कहा कि करोना से जंग में सतर्क रहते हुए नियमों का पालन करते हुए बचना भी है और आगे भी बढ़ना है। उन्होंने कहा कि हमें अपना संकल्प पूरा करना है। हमारा संकट इस संकट से भी विराट है। हम पिछली शताब्दी से लगातार कह रहे हैं कि 21वीं सदी हिंदुस्तान की है। कोरोना संकट के बाद भी दुनिया में हमें अपनपे आपको साबित करना है। यह हम सब की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि इसका एक ही मार्ग है आत्म निर्भर भारत। हमारे यहां शास्त्रों में भी कहा गया है कि आत्म निर्भर ही एक मात्र रास्ता है। इतनी बड़ी आपदा भारत के लिए एक संदेश,संकेत व अवसर लेकर आई है।


उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कोरोना संकट से पहले भारत में एक भी पीपीई किट नहीं बनती थी, एन 95 मास्क भी गिनती के ही बनते थे। आज इनकी संख्या दो—दो लाख हो गई है। हमने आपदा को अवसर में बदला यह नीति हमारे लिए आगे भी प्रभावी सिद्ध होने वाली है। आज दुनिया में आत्म निर्भर शब्द के मायने पूरी तरह से बदल गये हैं। आत्म केंद्रित बनाम मानव केंदित अर्थ व्यव्स्था के बीच संघर्ष हो रहा है। भारत जब आत्म केंद्रित निर्भरता पर यकीन नहीं करता बल्कि विश्व केंद्रित आत्म निर्भरता पर यकीन करता है। भारत की प्रगति में हमेशा विश्व की प्रगति समाहित रही है।

जब भारत खुले में शौच से मुक्त होता है तो दुनियाय की तस्वीर भी बदलती है। टीवी, कुपोषण,पोलियो जैसे अभियानों का असर दुनिया पर पड़े। उनहोंने कई अन्य उदाहरण भी दिए। उन्होंने कहा कि जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही दुनिया भारत की दवाइयों पर विश्वास जताती है। हम पर दुनिया विश्वास कर रही है। वे कहते हें मानव जाति के कल्याण के लिए बुहत अच्छा दे सकता है। 130 करोड़ देशवासियों का आत्मनिर्भर भारत का संकल्प ऐसा कर सकता है।

उन्होंने कहा कि शताब्दी की शुरुआत के समय आए वाई2के संकट से दुनिया को उबाारने में मदद की थी। हम सप्लाई चेन को आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि कच्छ भूकंप के दिन उन्होंने अपनी आखों से देखे हें। ऐसा लगता था कच्छ मौत की चादर ओढ कर सो चुका है। लेकिन देखते ही देखते कच्छ उठ खड़ा हुआ वह बढ़ता गया। यही हमारी संकल्प शक्ति है।

आज तो चाह और राह दोनों हैं। भारत की संकल्प शक्ति ऐसी है कि भारत आत्म निर्भर बन सकता है। आत्मनिर्भर भारत की इमारत पांच स्तंभों पर खड़ी होगी अर्थ व्यवस्था, संसाधन, सिस्टम, प्रजातंत्र में डेमोग्राफी और मांग। डिमांड और सप्लाई चेन की ताकत को पूरी क्षमता से इस्तेमाल करने की जरूरत है। पीएम मोदी ने कहा आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करेंगें जिसमें देश की मिट्टी की महक और मजदूरों के पसीने की खुशबू हो।

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