उत्तराखंडऊधमसिंह नगर

किच्छा : भगत सिंह की जयंती पर उत्तरांचल पंजाबी महिला महासभा ने किया याद

किच्छा में शहीद ए आजम की जयंती मनाते लोग

किच्छा। उत्तरांचल पंजाबी महिला महासभा की प्रदेश सचिव एवं नगर पालिका सभासद सिमरनजीत कौर के नेतृत्व में तमाम लोगों ने उनके कार्यालय पर शहीद ए आजम सरदार भगत सिंह की जयंती पर उन्हें याद किया और उनके चित्र पर माल्यार्पण कर पुष्प अर्पित कर मिष्ठान वितरित किया। सभासद सिमरनजीत कौर ने भगत सिंह की कुर्बानी को याद करते हुए कहा कि आज के दिन आजादी के परवाने सरदार भगत सिंह को याद करने का दिन है, जिसके लिए आजादी ही उसकी दुल्हन थी, सरदार भगत सिंह एक महान क्रांतिकारी के साथ-साथ एक अच्छे लेखक और एक अच्छे वक्ता भी थे।

उन्होंने कहा कि जलियांवाला बाग कांड ने भगत सिंह की बाल अवस्था में ही उनके मन में गहरा घाव छोड़ा था, उसी दिन उन्होंने भारत देश को आजाद कराने के लिए संघर्ष करने की ठानी थी और उसी संकल्प को निभाते के लिए भगत सिंह हंसते-हंसते फांसी पर चढ़ गए। इस मौके पर युवा व्यापारी नेता जगरूप सिंह गोल्डी ने कहा कि “इस कदर वाकिफ है मेरी कलम मेरे जज्बातों से, “अगर मैं इश्क लिखना भी चाहूं तो इंकलाब लिखा जाता है” ऐसी बात कहने वाले महान क्रांतिकारी एवं लेखक, अमर बलिदानी भगत सिंह को उनकी जयंती पर हम सभी लोग कोटि-कोटि नमन करते हैं।

गोल्डी ने बताया कि भगत सिंह की बाल अवस्था में ही क्रांतिकारी सोच थी, उनके जज्बे को हम भारतवासी याद करते रहेंगे। गोल्डी ने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के सबसे प्रभावशाली क्रांतिकारियों में एक भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1960 को हुआ था और बहुत ही छोटी आयु मात्र 23 वर्ष में वह शहीद हो गए थे, लेकिन अपने जीवन काल में उन्होंने एक मजबूत प्रभाव देश के युवाओं पर छोड़ा।

इस मौके पर गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा के पूर्व प्रधान सरदार गुरनाम सिंह धारीवाल, कर्मवीर सिंह रंधावा, गुरद्वारा श्री गुरु सिंह सभा के पूर्व खजांची परविंदर सिंह, पूर्व सभासद कलावती, महेंद्र ठाकुर, संजय सक्सेना, महेश पाल, अनीता, काजल मल्होत्रा, दीपक रानी, बालचंद, इंदर सिंह व नरेंद्र सिंह आदि लोग उपस्थित थे।

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क्योंकि भगत सिंह नहीं मरा करते हैं……

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