—आनन्द नेगी—

रानीखेत। उत्तराखंड के कद्दावर नेता और राज्य सरकार में परिवहन, समाज कल्याण मंत्री यशपाल आर्य के कांग्रेस में शामिल होने से राज्य में राजनीतिक समीकरणों पर असर पड़ेगा। इस घटना को कांग्रेस के पक्ष में एक बड़े फायदे के रुप में देखा जा रहा है। यशपाल के माध्यम से कांग्रेस राज्य के दलित मतदाताओं में अपनी पैठ मजबूत करने का प्रयास करेगी और नैनीताल तथा उधम सिंह नगर जिले में इसका सीधा फायदा कांग्रेस को मिलेगा। यशपाल आर्य की वापसी से कांग्रेस के कार्यकर्ता काफी उत्साहित नजर आ रहे हैं।

लंबे समय से गुटबाजी, नेताओं के आपसी मनमुटाव, चुनावों में लगातार पराजय और टूटन से उत्तराखंड में भी कांग्रेस के मनोबल पर असर पड़ा है । विधानसभा चुनाव से पूर्व भाजपा ने एक कांग्रेसी और दो निर्दलीय विधायकों को अपने पाले में लेकर कुनबा बढ़ाने के साथ ही मनोवैज्ञानिक बढ़त लेने का भी प्रयास किया। पिछले दिनों भाजपा के राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी ने यह कह कर कांग्रेस पर तंज कसा था कि बहुत से लोग भाजपा में आने को आतुर हैं, ऐसी स्थिति में नो एंट्री का बोर्ड लगाने की आवश्यकता पड़ सकती है।


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उनके इस बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कुछ दिनों के भीतर भाजपा को तोड़ने की बात कही थी, जो आज सच साबित हो गई। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बुरी पराजय का स्वाद चखना पड़ा था। इसके बाद कई चुनावों में लगातार पराजय के कारण कांग्रेसी मायूसी की हालत में थे। आमतौर पर कांग्रेस में और टूटन आने का अंदेशा था, लेकिन सोमवार को कद्दावर नेता यशपाल आर्य के शामिल होने से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नए सिरे से उत्साह का संचार हुआ है। खबरें वही जो समय पर मिले, तो जुड़िये हमारे WhatsApp Group से Click Now

भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए तीनों विधायकों का प्रभाव क्षेत्र उनके विधानसभा क्षेत्रों तक है, जबकि यशपाल आर्य उत्तराखंड में दलित राजनीति का बड़ा चेहरा माने जाते हैं। 6 बार यूपी और उत्तराखंड के विधायक चुने गए हैं। उत्तराखंड में विधानसभा अध्यक्ष और प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके हैं। कांग्रेस संगठन में उन्होंने कई अन्य पदों पर काम किया। 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले वह भाजपा में चले गए। आर्य के साथ उनके विधायक पुत्र संजीव आर्य ने भी भाजपा का दामन थामा।

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संजीव नैनीताल के विधायक हैं। दरअसल 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा में जाने वाले नेताओं से अलग स्थिति यशपाल आर्य की रही है। यशपाल आर्य उस समय कांग्रेस से अपने पुत्र संजीव के लिए भी विधानसभा का टिकट मांग रहे थे। टिकट नहीं मिलने के कारण वह भाजपा में चले गए। वहां पिता पुत्र दोनों को ही टिकट मिला और दोनों ही भारी मतों से जीत कर विधानसभा में पहुंचे। उत्तराखंड की भाजपा सरकार ने आर्य को परिवहन और समाज कल्याण मंत्री बनाया गया।

पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस से भाजपा में गए कुछ नेताओं की वापसी को लेकर अटकलें चल रही थी। कहा जा रहा था कि कांग्रेसी पृष्ठभूमि वाले नेताओं को भाजपा सरकार में वैसी अहमियत नहीं मिल रही है जैसी कांग्रेस में मिलती थी। हरक सिंह रावत अपनी इस व्यथा को कई बार सार्वजनिक भी कर चुके हैं। भाजपा में कांग्रेसी पृष्ठभूमि के अन्य नेताओं से हटकर यशपाल आर्य की अलग छवि रही है। उन्हें उत्तराखंड के सर्वाधिक निर्विवाद और शालीन स्वभाव वाले नेता के रूप में जाना जाता है।

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उत्तराखंड के दलित मतदाताओं में उनकी सीधी पकड़ है। इसका लाभ पिछली बार भाजपा को मिला था। श्री आर्य दो दशक से भी अधिक समय से यूपी और उत्तराखंड की राजनीति में सक्रिय हैं। खटीमा, सितारगंज बाजपुर, कालाढूंगी और हल्द्वानी विधानसभा क्षेत्र सहित नैनीताल और उधम सिंह नगर में उनकी मजबूत पकड़ है। सितारगंज क्षेत्र में किसान मतदाताओं की अच्छी तादात है। और इस इलाके में किसान आंदोलन का भी प्रभाव है। भाजपा को लेकर किसानों में नाराजगी है।

कुछ लोगों का मानना है कि ऐसे हालातों में चुनाव में नुकसान होने की आशंका के चलते यशपाल आर्य ने भाजपा को छोड़कर कांग्रेस का दामन थामा है। आर्य की घर वापसी से जहां कांग्रेस कार्यकर्ता उत्साहित हैं और पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं, वही निकट भविष्य में आर्य के साथ जुड़े अन्य लोगों के भी कांग्रेस में आने की अटकलें लगाई जा रही है।

चुनाव से पहले तक कांग्रेस और भाजपा में दलबदल का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों सहित पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल की मौजूदगी में यशपाल आर्य और संजीव आर्य सहित तराई के एक अन्य नेता ने कांग्रेस का दामन थामा। इससे पूर्व राहुल गांधी से उनकी मुलाकात हुई।

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कांग्रेस मुख्यालय पर हुए कार्यक्रम के दौरान मीडिया के सामने यशपाल आर्य और हरीश रावत ने बेहद इमोशनल अंदाज में इस मिलन के एहसास को व्यक्त किया। यशपाल आर्य ने कांग्रेश के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डाला। कांग्रेस को लोकतंत्र की सच्ची हितैषी पार्टी बताया। सोनिया गांधी का आभार जताया। यशपाल ने कहा की उन्हें सुखद अनुभूति, सुखद एहसास और काफी सुकून मिल रहा है। कांग्रेस मैं लौटने पर हृदय गदगद है।

उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह उत्तराखंड में दलितों, पिछड़ों और कुचले हुए लोगों की आवाज बनेंगे और कांग्रेस की मजबूती के लिए तन मन से कार्य करते रहेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भावुक अंदाज में कहा कि शरीर का एक हिस्सा अलग हो जाने से भारी तकलीफ होती है आज वही हिस्सा फिर से जुड़ रहा है। यह कांग्रेस के लिए चुनौती का दौर है। आर्य के आने से कांग्रेस पूरे बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करेगी और उत्तराखंड वासियों के सपने पूरे होंगे। यशपाल आर्य की घर वापसी के इस समारोह में वरिष्ठ नेताओं की बातें भविष्य की राजनीतिक दिशा की तरफ संकेत कर रही थी।

भाजपा को छोड़कर घर वापसी करने के बाद यशपाल किस तरह से भाजपा पर राजनीतिक हमले करेंगे, इसकी भी वानगी यशपाल और हरीश रावत के भाषणों में दिखाई देती है। पंजाब में मुख्यमंत्री के पद पर दलित नेता चरणजीत सिंह चन्नी की ताजपोशी के बाद देहरादून वापस लौटने पर हरीश रावत ने कहा था कि वह उत्तराखंड में दलित को मुख्यमंत्री देखना चाहते हैं। उस वक्त तक यशपाल के कांग्रेस में लौटने की खास उम्मीद नहीं थी, उस वक्त लोग इसे राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा की मुख्यमंत्री पद के लिए दावेदारी के रूप में देख रहे थे।

कांग्रेस में कद्दावर और लोकप्रिय नेता यशपाल आर्य के लौटने के बाद यह सवाल भी उठने लगा है कि कांग्रेस सत्ता में लौटी और मुख्यमंत्री पद पर किसी दलित की ताजपोशी का दांव चला गया तो यशपाल आर्य प्रबल दावेदार हो सकते हैं। यह सब भविष्य के गर्भ में छिपा है, लेकिन इतना तय है यशपाल की वापसी से कांग्रेस मजबूत हुई है।

घर वापसी पर कुंजवाल ने जताया आभार

रानीखेत। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने वरिष्ठ नेता यशपाल आर्य घर वापसी पर गहरी प्रसन्नता व्यक्त की है और उनके इस कदम के लिए आभार जताया है। कुंजवाल ने वीडियो के माध्यम से जारी संदेश में कहा है कि यशपाल आर्य मूल रूप से कांग्रेसी विचारधारा के हैं। पार्टी और सरकारों में कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं।

वर्तमान भाजपा सरकार में भी वह मंत्री थे। लेकिन भाजपा जिस तरीके से लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन कर रही है इससे वह आहत हैं। लोकतंत्र की रक्षा और समाज सेवा के लिए उन्होंने कांग्रेस में वापसी का निर्णय लिया। पार्टी में उनकी वापसी से कांग्रेस की सत्ता में शानदार वापसी का मार्ग प्रशस्त हो गया है। कोई भी ताकत कांग्रेस को सरकार बनाने से नहीं रोक पाएगी। खबरें वही जो समय पर मिले, तो जुड़िये हमारे WhatsApp Group से Click Now

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